गुजरात सरकार कर्म्चारियोने फिक्स्पगार आपी खर्च घटादवा जजुमे छे ,आ वर्षे 70000 नि नवी नोकरी सामे 28992 कर्मचारी निवृत थशे जो आ न्युज रिपोर्ट

फिक्सपगार दारो नधिकार मंचनी टीम अने बीजा लोको अने संगठनो पण मारी साथे जोडावाना छे त्यारे आपना परिवार माथी पण लोको जोडाय शके छे..अने आ उपवास ना समय दरम्यान ज्यारे रजानो दिवस आवतो हशे त्यारे गुजरातना तमाम कर्मचारी उपवास ना स्थण पर वधुमा वधु सख्यामा हाजरी आपी एक दिवसना प्रतिक उपवास करी आ प्रोग्राम मा जोडाय शके छे...


कर्मचारियों के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण एवं स्वागत योग्य आदेश जारी किया है। माननीय न्यायालय का कहना है कि यदि राज्य सरकार ने उसे वेतन दिया है तो वो उसका कर्मचारी हुआ। संविदा या कोई दूसरा नाम देकर उसे अस्थाई करार नहीं दिया जा सकता। यदि यह आदेश एप्लिकेबल हुआ तो देश भर में कोई भी कर्मचारी अस्थाई नहीं रहेगा। 

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एक शिक्षक वो व्यक्ति होता है जो अपने विद्यार्थी को सबसे बेहतरीन शिक्षा उपलब्ध कराने के द्वारा हरेक के भविष्य को आकार देता है। हर विद्यार्थी की शिक्षा में एक शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। एक शिक्षक के पास बहुत सारे गुण होते हैं और वो अपने विद्यार्थी के जीवन को सफल बनाने में पूरी तरह से दक्ष होता है। एक शिक्षक बहुत समझदार होता है और अच्छे से जानता है कि विद्यार्थी का ध्यान पढ़ाई की ओर कैसे लगाना है। पढ़ाई के दौरान एक शिक्षक रचनात्मकता का इस्तेमाल करता है जिससे विद्यार्थी एकाग्र हो सके। एक शिक्षक ज्ञान का भण्डार होता है और उसके पास बहुत धैर्य और विश्वास होता है जो विद्यार्थियों के भविष्य की जिम्मेदारी लेता है। शिक्षक हरेक बच्चे की क्षमता का अवलोकन करता है और उसी अनुसार उस बच्चे को पढ़ाई में मदद करता है।

शिक्षक ज्ञान, समृद्धि और प्रकाश का एक बड़ा स्रोत होता है जिससे कोई भी जीवनभर के लिये लाभ प्राप्त कर सकता है। वो हरेक के जीवन में वास्तविक प्रकाश के रुप में होते हैं क्योंकि वो जीवन में उनका रास्ता बनाने के लिये विद्यार्थियों की मदद करते हैं। वो किसी व्यक्ति के जीवन में प्रभु का दिया हुआ एक उपहार होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के हमें सफलता की ओर उन्मुख करते हैं। वास्तव में, शिक्षा के माध्यम से हमारे राष्ट्र के चकित कर देने वाले भविष्य के निर्माता के रुप में हम उन्हें बुला सकते हैं।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अस्थाई कर्मचारियों के बारे में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत पदों के लिए नियमित भर्ती प्रक्रिया अपनाते हुए चयनित कर्मचारियों के नियुक्ति आदेश में केवल संविदा पर लिख देने से वे अस्थाई नहीं हो जाते।ऐसे कर्मचारियों को प्रतिमाह फिक्स सैलेरी देना व उनकी सेवाओं को नियमित नहीं करना असवैंधानिक नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के कर्नाटक बनाम उमादेवी मामले में पारित अंतिम निर्णय का पालन करना सरकार के लिए ओब्लिगेशन है। इसलिए याचिकाकर्ता सहित उसके समान अन्य को तीन माह में सरकार नियमित करे। यह आदेश वरिष्ठ न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने याचिकाकर्ता बीकानेर निवासी यशवंत सिंह कि ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।

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