फिक्सपगार अन्याय मामले ठेर ठेर रैली जुओं आजनो फिक्सपगारधारको ने लागतो न्यूज रिपोर्ट

कर्मचारियों के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण एवं स्वागत योग्य आदेश जारी किया है। माननीय न्यायालय का कहना है कि यदि राज्य सरकार ने उसे वेतन दिया है तो वो उसका कर्मचारी हुआ। संविदा या कोई दूसरा नाम देकर उसे अस्थाई करार नहीं दिया जा सकता। यदि यह आदेश एप्लिकेबल हुआ तो देश भर में कोई भी कर्मचारी अस्थाई नहीं रहेगा।

राजस्थान हाईकोर्ट ने अस्थाई कर्मचारियों के बारे में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए कहा है कि राज्य सरकार द्वारा स्वीकृत पदों के लिए नियमित भर्ती प्रक्रिया अपनाते हुए चयनित कर्मचारियों के नियुक्ति आदेश में केवल संविदा पर लिख देने से वे अस्थाई नहीं हो जाते।ऐसे कर्मचारियों को प्रतिमाह फिक्स सैलेरी देना व उनकी सेवाओं को नियमित नहीं करना असवैंधानिक नहीं बल्कि सर्वोच्च न्यायालय के कर्नाटक बनाम उमादेवी मामले में पारित अंतिम निर्णय का पालन करना सरकार के लिए ओब्लिगेशन है। इसलिए याचिकाकर्ता सहित उसके समान अन्य को तीन माह में सरकार नियमित करे। यह आदेश वरिष्ठ न्यायाधीश गोपाल कृष्ण व्यास ने याचिकाकर्ता बीकानेर निवासी यशवंत सिंह कि ओर से दायर याचिका को स्वीकार करते हुए दिया।

फिक्स-कलम लंबे राज्य में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया है। गुजरात के मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल सेवा phksi-कौड़ी की आधिकारिक शुरुआत की गई है। अब इस मुद्दे को भारी राजनीतिक गर्मी की गई है। फिक्स अधिक कर्मचारियों को अब 4 लाख नौकरी राज्य नौकरी कर रहे हैं। कर्मचारियों को पांच साल के बाद एक स्थायी नौकरी की गई है, सरकार की योजना के अनुसार। द्वारा phksi-पेना कर्मचारियों लंबे सरकार की नीति का शोषण करने का विरोध किया गया है। गुजरात उच्च न्यायालय ने पहले ही phksi-पेना कर्मचारियों जीता है। पर सुप्रीम कोर्ट phksi पर अभ्यास के बजाय उच्च न्यायालय ने रद्द की राज्य
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